New Delhi, India

इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स को सिर्फ किताबी ज्ञान, प्रैक्टिकल में पिछड़े

Engineering Graduates

इंजीनियरिंग कॉलेजों से डिग्री लेकर निकलने वाले नए छात्र इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं होते ज्यादातर छात्रों को विषय का केवल किताबी ज्ञान होता है प्रैक्टिकल के मामले में छात्र पिछड़े होते हैं इंडस्ट्री भी अब ऐसे छात्रों को नौकरी देने से बच रही है जिन्हे प्रैक्टिकल ज्ञान नहीं होता प्रेक्टिकल के मामले में छात्र पिछड़े होते हैं। इंडस्ट्री भी अब ऐसे ग्रेजुएट छात्रों को नौकरी देने से बच रही हैं, जिन्हें प्रेक्टिकल नॉलेज नहीं होता है। 90 फीसदी इंडस्ट्रीज चाहती हैं कि छात्र ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद स्किल डेवलपमेंट के लिए कोई सर्टिफिकेट कोर्स कर ले। इस समय इंडस्ट्री किसी भी नए ग्रेजुएट छात्रों को सीधे नौकरी पर रखकर उन्हें अलग से प्रशिक्षित नहीं करना चाहती हैं।

इंजीनियरिंग छात्रों की काबिलियत और इंडस्ट्रीज की मजबूरी की यह जमीनी हकीकत बुधवार को राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित इंडस्ट्री-एकेडेमिया मीट में सामने आई। इस बैठक में नेस्काम, सीआईआई, पीथमपुर एवं मंडीदीप औद्योगिक संगठन के अलावा 45 से भी अधिक उद्योगों द्वारा भाग लिया गया। इसमें विप्रो, टीसीएस व केपजेमिनी जैसी देशी की जानी मानी सॉफ्टवेयर कंपनियां भी शामिल थीं। उद्याेगों से आए प्रतिनिधियों ने बताया कि इंजीनियरिंग कॉलेजों से हर साल जो नए छात्र डिग्री लेकर निकल रहे हैं उनमें प्रेक्टिकल नॉलेज की कमी हैं। बतौर फ्रेशर वे इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं होते हैं। इंडस्ट्री भी ट्रेंड करने में पैसा और समय बर्बाद नहीं करना चाहती हैं। – Dainik Bhasker